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|| सैली शिंगी शिर जटा झोली भगवा भेस कानन कुंडल भस्मि लसे शिव गोरक्ष आदेश ||

प्रभु श्रीरामचंद्र, लक्ष्मण, सिता १४ साल वनवास काल मे गोदावरी नदी उत्तर तिर पर इसी परिसर "पंचवटी" मे वास्तव्य के लिये थे. इस परिसर मे प्रभु की पर्णकुटी थी! इसी परिसर मे नयन मनोहर 'श्री कालाराम मंदिर' हे!. श्री प्रभुश्रीरामचंद्रजी के वास्तव्य से उनके चरणस्पर्श से पावन होने वाली इसि भुमिपर इसी परिसर मे श्री कालाराम मंदिर के दक्षिण द्वार मे यह हमारा नाथ संप्रदाय का पावन अस्थान हे !

यहा धुनी माता की स्थापना 1974 साल मे कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुई थी! और ये नाथ संप्रदाय का अस्थान हे यहा साधू संतोकी सेवा हमारे गुरुजी औघड पीर रतन नाथजी के मार्गदर्शन मे होती हे. हर मोसम मे यहा सेवा होती हे जैसे धूपने वस्त्र, बरसात मे छाता, और थंड मे कंबल की सेवा होती हे! और सब संप्रदायके साधू की सेवा यहा होती हे! और यहा एक 200 साल पुराणा पीपल का वृक्ष हे उसकी भी सेवा यहा होती हे!

हर साल यहा धर्मनाथ बीज का उत्सव बडे आनंद के साथ भजन कीर्तन तथा भंडारा प्रसाद से होता हे !

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